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जानिए Alternator क्या है ? और Alternator में कौन - कौन से Parts होते है ?

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फ्रेंड्स स्वागत है आपका sk article में .| आज के इस आर्टिकल में हम जानेगे alternator के बारे में | एक Alternator जिसे हिंदी में प्रत्यावार्तक कहा जाता है तथा जिसमे विभिन्न प्रकार के भाग ( parts ) होते है जिनका alternator में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है | 

इस पोस्ट में हम जानेंगे -
Alternator क्या है ?
Alternator की Input Power एवं Output Power

Alternator के भाग - रोटर ,स्टेटर ,एक्साइटर तथा प्राइममूवर 

Alternator क्या है ?
Alternator in hindi , what is alternator

Alternator विद्युत उत्पन्न करने वाली एसी मशीन है जो हमे प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) प्रदान करती है | इसे हिंदी भाषा में प्रत्यावार्तक भी कहा है | चूँकि alternator प्रत्यावर्ती Alternating current उत्पन्न करता है इसलिए इसे AC Generator के नाम से भी जाना जाता है | जब alternator को input  में यांत्रिक उर्जा ( Mechanical Energy ) दी जाती है तो यह Mechanical Energy अल्टरनेटर के द्वारा output में वैद्युतिक उर्जा ( Electrical Energy ) में रूपांतरित कर दी जाती है | और हमे प्रत्यावर्ती विद्युत धारा प्राप्त होने लगाती है |


Alternator की Input Power एवं Output Power

जैसा की आप ऊपर जान ही गये हे की Alternator की Input power Mechanical होती है तथा Output Power Electrical होती है | 

Alternator Input Power  - Alternator की Input Power उसकी शाफ़्ट पर दी जाती है | जो की mechanical power होती है जिसकी Rating हम HP मतलब Hourse Power में व्यक्त करते है | 

Alternator Output Power - Alternator की Output Power रोटर वाइंडिंग से टर्मिनल प्लेट पर प्राप्त की जाती है | जो की Electrical Power होती है जिसकी Rating हम KVA ( किलो वोल्ट एम्पीयर ) में व्यक्त करते है |


Alternator के भाग ( Parts of Alternator ) - 
Parts of Alternator in hindi 

एक Alternator में मुख्य रूप से तीन भाग होते है -

1. रोटर ( Rotor ) 
2. स्टेटर ( stator )
3.  एक्साइटर ( Excitor )
4.  प्राइम मूवर ( Prime Mover )

1. रोटर ( Rotor ) - alternator का घुमने वाला भाग रोटर कहलाता है | इसी भाग से हमे alternator से विद्युत प्राप्त होती है | रोटर में 3 फेज की वाइंडिंग स्थापित की जाती है | यह वाइंडिंग रोटर में सिलिकॉन स्टील से बने एक ड्रम में स्थापित करते है तथा प्रत्येक वाइंडिंग के बिच 120 डिग्री का इलेक्ट्रिकल एंगल रखा जाता है | इसी कारण से हमे प्राप्त होने वाली थ्री फेज की सप्लाई में 120 डिग्री का एंगल होता है और यही वैद्युतिक कोण ( इलेक्ट्रिकल एंगल ) हमे किसी भी दो फेज या थ्री फेज की वाइंडिंग में प्रत्यावर्ती एवं घुमावदार चुम्बकीय क्षेत्र प्रदान करता है | Rotor में यांत्रिक शक्ति प्राप्त करने के लिए Mild steel की शाफ़्ट बनायीं जाती है तथा इस साफ्ट पर तीन Slip Ring लगायी जाती है जो हमे उत्पन्न होने वाले विद्युत वाहक बल को प्राप्त करने के लिए लगाते है |


किसी भी alternator में रोटर दो प्रकार के होते है -

( i ) सेलियंट पोल रोटर ( Salient Pole Rotor ) - सामान्यत इस प्रकार के रोटर उन alternator में उपयोग किये जाते है जिनमे पोलो की संख्या अधिक होती है तथा जिनकी घूर्णन गति कम होती है लगभग 1000 RPM तक |

( ii ) बेलनाकार रोटर ( cylinderical Rotor ) - बेलनाकार प्रकार के रोटर उन alternator में उपयोग किये जाते है जिनमे पोलो की संख्या कम होती है तथा जिनकी घूर्णन गति अधिक होती है लगभग 1500 से 3000 RPM तक |

2. स्टेटर ( stator ) - यह alternator का स्थिर भाग होता है जिसमे फील्ड पोल्स स्थापित किये जाते है | इन पोल के उपर वाइंडिंग की जाती है जिसे DC सप्लाई से जोड़ा जाता है जिसके कारण इस वाइंडिंग में स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है इसी चुम्बकीय क्षेत्र के मध्य जब रोटर को घुमाया जाता है तो रोटर वाइंडिंग में फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के अनुसार विद्युत वाहक बल उतपन्न होता है | 

3.  एक्साइटर ( Excitor ) - स्टेटर पोल को चुम्बकित करने के लिए DC सप्लाई एक्साइटर से प्राप्त की जाती है | एक्साइटर एक छोटा डी.सी. शंट अथवा कंपाउंड generator होता है जिसकी डी.सी. वोल्टेज क्षमता 220 volt तक होती है | 

नोट - कुछ alternator में एक्साइटर की जगह रेक्टीफायर का भी उपयोग किया जाता है | और स्व उतेजित प्रकार के alternator में रेजूड्युअल मेग्नेट यानि अवशिष्ट चुम्बकत्व का उपयोग किया जाता है |


4.  प्राइम मूवर ( Prime Mover ) - alternator की शाफ़्ट को घुमाने के लिए अर्थात यांत्रिक शक्ति प्रदान करने के लिए जिस मशीन का उपयोग किया जाता है उसे प्राइम मूवर के नाम से जाना जाता है | यह मशीन DC मोटर , टरबाइन या डीजल इंजन हो सकता है | प्राइम मूवर का चयन alternator की RPM क्षमता के अनुसार किया जाता है |

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