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What is Magnet | चुम्बक क्या है, चुम्बक के प्रकार एवं उपयोग

What is Magnet
What is Magnet


प्रकृति ने हमे कई ऐसे उपहार दिये है जिनके उपयोग से हमारा जीवन सरल हो हो गया | ऐसा ही एक पदार्थ है चुम्बक | वैसे तो यह एक पत्थर है लेकिन इसके उपयोग ने आज मानव जीवन को काफी सुविधाजनक एवं आनंदमय कर रखा है |
नमस्कार और स्वागत है आपका SK आर्टिकल डॉट कॉम में ....इस आर्टिकल में हम जानेंगे चुम्बक क्या है , चुम्बक कितने प्रकार के होते है तथा चुम्बक का उपयोग क्या है |

चुम्बक क्या है | What is Magnet 

चुम्बक ऐसा पदार्थ हे जिसमे लोहे के छोटे छोटे कण को अपनी आकर्षित करने का गुण विद्यमान होता है और यदि इसे किसी धागे से बांधकर स्वत्रंतापूर्वक लटकाया जाता है तो इसमें हमेशा उत्तर - दक्षिण दिशा में ठहरने का गुण विद्यमान होता है |

चुम्बक कितने प्रकार के होते है |

वैसे तो चुम्बक को कई छोटी - छोटी सब केटेगरी में बाँट सकते है लेकिन मुख्य रूप से चुम्बक के दो प्रकार होते है -

  • प्राकृतिक चुम्बक ( Natural Magnet )
  • कृत्रिम चुम्बक ( Artifficial Magnet )


1. प्राकृतिक चुम्बक ( Natural Magnet ) - सर्वप्रथम एशिया के मैग्नेशिया नामक स्थान पर एक पत्थर पाया गया जिसे लोड स्टोन कहा गया | इस पत्थर में लौहे के छोटे - छोटे कणों को अपनी और आकर्षित करने का तथा स्वतंत्रता पूर्वक लटकाए जाने पर उत्तर - दक्षिण दिशा में ठहरने का गुण पाया गया  |
  इस पत्थर  के इस गुण के कारण इस पत्थर का उपयोग नाविकों द्वारा समुद्र में दिशा ज्ञात करने में किया जाने लगा |

इस प्रकार के प्राकृतिक चुम्बक का आकार व वजन तो अधिक होता है लेकिन वजन के अनुसार इसमें चुम्बकीय गुण / शक्ति बहुत कम मात्रा की होती है | वर्तमान मानव द्वारा बनाये गये कृत्रिम चुम्बक की चुम्बकीय शक्ति के आगे इनकी चुम्बकीय शक्ति काफी कम हे और अब इनका उपयोग अब नगण्य हो चूका है |

हमारे भारत में प्राकृतिक चुम्बक /पत्थर तमिलनाडु तथा उड़ीसा राज्यों में पाया जाता है |

2. कृत्रिम चुम्बक ( Artificial Magnet ) - मानव द्वारा कृत्रिम विधि का का उपयोग करते हुए चुम्बकीय पदार्थों द्वारा बनाया गया चुम्बक , कृत्रिम चुम्बक कहलाता है |
यह कृत्रिम चुम्बक मुख्य रूप से दो प्रकार के बनाये जाते है -

  • स्थायी चुम्बक ( Artificial Magnet )
  • अस्थायी चुम्बक ( Temporary Magnet ) 


I. स्थायी चुम्बक (Artificial Magnet ) - कृत्रिम विधि द्वारा कार्बन स्टील और कोबाल्ट स्टील धातु जिसे फौलाद भी कहा जाता है का उपयोग करके चुम्बक बनायीं जाती है इसी चुम्बक को स्थायी चुम्बक कहा जाता है | बनायीं गयी इस स्थायी चुम्बक का चुम्बकीय गुण अनेक वर्षो तक बना रहता है |

स्थायी चुम्बक उपयोग के आधार पर कई आकार की बनायीं जाती है जैसे - छड चुम्बक , यू-आकृति चुम्बक , बेलनाकार चुम्बक , हार्स शू चुम्बक , सुई आकृति की चुम्बक आदि |

II. अस्थायी चुम्बक ( Temporary Magnet ) - वह चुम्बक जिसके चुम्बकत्व का अस्तित्व केवल निश्चित समय तक रहता है अस्थायी चुम्बक कहलाता है |
विद्युत चुम्बक को हम एक अस्थायी चुम्बक कहते है जिसमे चुम्बकत्व का अस्तित्व या कहे की चुम्बकीय गुण केवल तब तक रहता है जब तक इसमें विद्युत् धारा प्रवाहित की जाये | इसे बनाने के लिए नर्म लौहे की छड पर कॉपर के या एल्युमिनियम के तार की वाइंडिंग की जाती है |

इस चुम्बक की विशेषता यह होती है की इससे आवश्यकता अनुसार कितना भी शक्तिशाली चुम्बक बनाया जा सकता है |

चुम्बक के उपयोग | Uses Of Magnet In Hindi

I. स्थायी चुम्बक के उपयोग - स्थायी चुम्बक का उपयोग लाउडस्पीकर , हैडफोन , डायनामो , मीटर , चुम्बकीय सुई आदि में किया जाता है |

II. अस्थायी चुम्बक के उपयोग -  अस्थायी चुम्बक का उपयोग विद्युत् घंटी , विद्युत् मोटर , विद्युत् जनरेटर ,इलेक्ट्रिकल उपकरण , रिले , MCB आदि में किया जाता है |

चुम्बक के गुण | Properties of a Magnet

किसी भी चुम्बक की पहचान करने उनको सुरक्षित रखने के लिए चुम्बक के इन गुणों को ध्यान रखना चाहिए
👉. चुम्बक को स्वतंत्रता पूर्वक लटकाए जाने पर वह सदैव उत्तर - दक्षिण दिशा में ही ठहरता है |
👉. इसमे लौहे के छोटे - छोटे टुकड़ों को अपनी और आकर्षित करने का गुण पाया जाता है |
👉. किसी चुम्बक को हथोड़े से पीटने से तथा गर्म करने से उसकी चुम्बकीय शक्ति नष्ट हो जाती है |
👉.यदि चुम्बक के आस पास कोई चुम्बकीय पदार्थ रखा जाये जैसे लौहा , निकिल , कोबाल्ट आदि तो उन पदार्थों में भी चुम्बक का गुण उत्पन्न हो जाता है |
👉. यदि चुम्बक को टुकड़ों में तोड़कर विभाजित कर दिया जाये तो प्रत्येक टुकड़े में चुम्बक के दो ध्रुव उत्पन्न हो जाते है |
👉.चुम्बक में एक ध्रुव का कोई अस्तित्व नही होता प्रत्येक चुम्बक में सदैव दो ध्रुव होंगे जिन्हें उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव के नाम से जाना जाता है |
👉.सभी चुम्बक में दोनों ध्रुवों की पोल सामर्थ्य बराबर होती है |
👉. किसी भी चुम्बक को कभी भी उसकी संतृप्त अवस्था से अधिक चुम्बकित नही किया जा सकता है |
👉. चुम्बक के दो सामान ध्रुवों के बिच प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवों के मध्य आकर्षण होता है | जैसे N , N ध्रुवों को पास लाने पर वह एक दुसरे को दूर धकेलते है तथा N और S ध्रुव को पास लाने पर वह एक दुसरे को अपनी और खींचते है |

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