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Sodium Vapour Lamp क्या है इसका डायग्राम , वर्किंग तथा उपयोग


वैसे तो आपने कई प्रकार के लैंप देखें होंगे और उनके बारे में पढ़ा होगा लेकिन आज के इस आर्टिकल में हम Sodium Vapour Lamp के बारे में पढने वाले है | यदि आप जानना चाहते है की सोडियम वेपर लैंप किसे कहते है , कैसे कार्य करता है , इसकी बनावट कैसे होती है तथा सोडियम वेपर लैंप की कार्य प्रणाली क्या है | तो यह आर्टिकल आप पूरा पढ़े यहाँ आपको सोडियम वेपर लैंप की पूरी जानकारी पढने को मिल जाएगी |

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sodium vapour lamp

Sodium Vapour Lamp क्या है 

यह एक प्रकार का गैस डिस्चार्ज लैंप है जिसमें नियोन गैस के साथ सोडियम के दाने भरे जाते है | जब इस लैंप को उच्च विभवान्तर की सप्लाई से जोड़ा जाता है तो यह हल्का पिला प्रकाश उत्पन्न करने लगता है | इसमें भरे सोडियम के दाने गर्म होकर वाष्पित होते है इसी कारण से इसे Sodium Vapour Lamp ( सोडियम वेपर लैंप ) कहा जाता है | इस लैंप को कोल्ड कैथोड लैंप भी कहा जाता है |

सोडियम वेपर लैंप की बनावट 

Sodium Vapour Lamp एक U आकर की ट्यूब होती है जिसके दोनों सिरों पर ऑक्साइड युक्त टंग्स्टन के इलेक्ट्रोड स्थापित किये जाते है | इस U आकार वाली नली में नियोन गैस के साथ सोडियम के दाने भरे जाते है | इस ट्यूब के चारो और एक और U आकर की  दोहरी दिवार वाली कांच की ट्यूब लगाई जाती है |

आंतरिक और बाहरी ट्यूब के बिच खाली स्थान को वायु रहित कर देते है जिसके कारण यह लैंप तापमान परिवर्तन से प्रभावित नही होता है | इस लैंप में प्रयोग किये गये टंग्स्टन इलेक्ट्रोड को उच्च वोल्टेज सप्लाई देने के लिए इसमें एक उच्च रिएक्टेंस वाले ट्रांसफार्मर का उपयोग किया जाता है | तथा इस ट्रांसफार्मर की प्राइमरी वाइंडिंग के साथ समान्तर क्रम में  एक कैपेसिटर भी संयोजित किया जाता है |

Sodium Vapour Lamp Circuit Diagram

Sodium Vapour Lamp Circuit Diagram
Sodium Vapour Lamp Circuit Diagram


सोडियम वेपर लैंप की कार्य प्रणाली 

इस लैंप में उपयोग किये गये टंग्स्टन के फिलामेंट को जब उच्च रिएक्टेंस वाले ट्रांसफार्मर के साथ जोड़ा जाता है तो स्टार्टिंग में लैंप में भरी गैस के कारण ट्रांसफार्मर लोड रहित अवस्था में रहता है जिस कारण से दोनों इलेक्ट्रोड के बिच विभवान्तर का मान लगभग 380 से 450 वोल्ट होता है |

 इस अधिक वोल्टेज वाले विभवान्तर के कारण लैंप में भरी नियोन गैस में इलेक्ट्रान - डिस्चार्जिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिस कारण से सोडियम के दाने गर्म होने लगते है और सोडियम के ठोस दानो का वाष्पीकरण शुरू हो जाता है |

जब स्टार्टिंग में सोडियम के दानो का वाष्पीकरण शुरू होता है उस समय लैंप से लाल - गुलाबी रंग का प्रकाश निकलता है  | तथा सोडियम के कणों के पूर्ण रूप से वाष्प बन जाने पर सोडियम की वाष्प में भी इलेक्ट्रान - डीस्चार्जिंग की प्रक्रिया चालू हो जाती है |

सोडियम वाष्प में इलेक्ट्रान - डीस्चार्जिंग की प्रक्रिया पूर्ण हो जाने पर यह लैंप हल्के पीले रंग की तेज प्रकाश उत्पन्न करने लगता है |

इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण होने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगता है | लैंप के पूरी तरह प्रकशित हो जाने पर ट्रांसफार्मर की आउटपुट वोल्टेज घटकर लगभग 110 वोल्ट रह जाता है | इस प्रक्रिया में हुए पॉवर फैक्टर की गिरावट को पूरा करने के लिए  ट्रांसफार्मर की प्राइमरी में जुड़े कैपीसिटर का उपयोग होता है |

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तो इस आर्टिकल में हमने पढ़ा Sodium Vapour Lamp के बारे में यदि यह जानकरी आपको पसंद आती है तो कृपया अपने साथियों के साथ जरुर शेयर करे |

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