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DC Series Motor क्या है ? इसका उपयोग तथा कनेक्शन कैसे किये जाते है ?

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dc series motor


जब कभी हमे ज्यादा स्टार्टिंग की आवश्यकता होती है तो हम विभिन्न प्रकार की उपलब्ध मोटरों में से सिर्फ dc series motor का चयन करते है | dc series motor हमारे इलेक्ट्रिक ट्रेन में , क्रेन मशीन में तथा होइस्ट जैसे साधनों में उपयोग की जाती है | यदि आप जानना चाहते है की dc series motor क्या है , इसमें कौन – कौन से भाग होते है ,यह कैसे कार्य करती है तथा इसका उपयोग कहाँ -कहाँ किया जाता है तो यह आर्टिकल आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है  | हेल्लो फ्रेंड्स मै सोनू कुमार कछावा और आप पढ़ रहे है एस .के. आर्टिकल डॉट कॉम …. आइये पढ़ लेते हे DC Series Motor के बारे में –

 
DC Series Motor | डी.सी. श्रेणी मोटर क्या है 
 
फ्रेंड्स DC Series Motor एक एसी मोटर जिसकी फील्ड तथा आर्मेचर वाइंडिंग आपस में श्रेणीक्रम में जुडी होती है | इस मोटर की फील्ड वाइंडिंग मोटे तार तथा कम टर्न की बनायीं जाती है | जिसके कारण इसमें ज्यादा से ज्यादा करंट प्रवाहित हो सकती है | इस मोटर की लोड करंट ,आर्मेचर करंट तथा सीरीज फील्ड करंट बराबर होती है | इस मोटर का स्टार्टिंग टार्क फुल लोड करंट टार्क का 5 गुना तक अधिक होता है | 

Uses of DC Series Motor | डी.सी. श्रेणी मोटर के उपयोग 
 
इस मोटर का स्टार्टिंग टार्क बहुत अधिक होता है यानि की आम भाषा में कहे तो गति बहुत अधिक होती है | इस मोटर को कभी भी बिना लोड जोड़े नही चलाना चाहिए क्यूंकि इस मोटर की गति इतनी तेज होती है की यदि इसकी शाफ़्ट पर कम या बिना लोड जोड़े इसे चलाया जाये तो तो इसकी फील्ड वाइंडिंग उखड सकती है और कोई दुर्घटना घटित हो सकती है | इस मोटर की इसी विशेषता के कारण इसका उपयोग भारी तथा उच्च स्टार्टिंग टार्क की आवश्यकता वाले साधनों में किया जाता है जैसे – ट्रेन में , क्रेन में , ट्रैक्शन कार्य में होएस्ट में आदि |
 

 
DC Series Motor Connection | डी.सी. श्रेणी मोटर के कनेक्शन 
dc series motor connection diagram
 
फ्रेंड्स DC Series Motor के कनेक्शन करने के लिए हमे सबसे पहले हमे आर्मेचर तथा सीरीज फील्ड वाइंडिंग के टर्मिनल की पहचान कर अलग – अलग करना होगा  | इसके लिए हम मल्टीमीटर या सीरीज टेस्टिंग बोर्ड का उपयोग उपयोग कर सकते है | पहचान करने के बाद सीरीज फील्ड वाइंडिंग के एक सिरे को आर्मेचर वाइंडिंग के एक सिरे से जोड़ देते है इसके बाद सीरीज वाइंडिंग के बचे हुए एक सिरे तथा आर्मेचर वाइंडिंग के बचे हुए सिरे को DC सप्लाई के + तथा – टर्मिनल से जोड़ देते है | 
 
नोट – सप्लाई से जोड़ने से पूर्व मोटर की शाफ़्ट को किसी लोड बेल्ट या मैकेनिकल लोड से जोड़ना चाहिए | बिना लोड के यह खतरनाक सिद्ध हो सकती है |
 
 
DC Series Motor से  याद रखने योग्य – 
 
👉 इस मोटर की फील्ड वाइंडिंग मोटे तार तथा कम टर्न की बनायीं जाती है जिसके कारण इसका प्रतिरोध कम होता है |
👉 इस मोटर का उपयोग उच्च स्टार्टिंग टार्क वाले साधनो में किया जाता है | 
👉 विद्युत रेल गाड़ी में इसी मोटर का उपयोग किया जाता है |
👉 इस मोटर को कभी भी बिना लोड के नही चलाना चाहिए |
👉 इस मोटर की फील्ड तथा आर्मेचर वाइंडिंग को हमेशा श्रेणी क्रम में जोड़कर ही सप्लाई से जोड़ना चाहिए यदि इन दोनों वाइंडिंग को समान्तर क्रम में जोड़कर चलाया जाये तो शोर्ट सर्किट हो सकता है या वाइंडिंग जल सकती है |
👉 मोटर स्टार्ट करने के लिए सेफ्टी डिवाइस के साथ स्टार्टर का उपयोग करना चाहिए |
 
यह भी पढ़िए –
 
तो फ्रेंड्स यह थी DC Series Motor के बारे में कुछ सामान्य जानकरी | यदि यह जानकरी आपको पसंद आती हे तो कृपया निचे दिए गये शेयर बटन का उपयोग कर अपने साथियों के साथ जरुर शेयर करे | और यदि इस आर्टिकल से जुडी अन्य कोई जानकारी चाहते हे तो कृपया हमे निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करे |

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2 Comments

  1. DC motor ke sbhi advantage and disadvantage

  2. Sonu Kumar Kachhawa says:

    DC motor ke advantage and disadvantage site par availbal hai aap search box me search kare.

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