ट्रांसफार्मर कोर क्या है ? कितने प्रकार की होती है | Transformer Core in Hindi

ट्रांसफार्मर में चुम्बकीय फ्लक्स को रास्ता प्रदान करने एवं चुम्बकीय क्षेत्र को सघन करने के लिए क्रोड़ का उपयोग किया जाता है | ट्रांसफार्मर की कोर के बारे में इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे |

transformer core in hindi
transformer core

ट्रांसफार्मर कोर क्या है

ट्रांसफार्मर कोर = यह है सिलिकॉन स्टील की बनाई जाती है जिसमें एडी करंट व हिस्टेरिसिस लॉस ट्रांसफॉर्मर मे कम होता है |प्रत्येक कोर को लेमिनेशन वार्निश के द्वारा दोनों तरफ से इंसुलेट किया जाता है | लेमिनेशन की मोटाई 0. 35 मि.मी से 0.5 मि.मी तक होती है| कोर का काम मैग्नेटिक फ्लक्स को आसान रास्ता प्रदान करना है कोर के जिस भाग पर वाइंडिंग की जाती है उसे लिंब करते हैं।

ट्रांसफॉर्मर की कोर की धातु और उपयोग।

  • 1. यह स्थिर यंत्र होने के कारण इसमें कोई आवाज नहीं होती है!
  • 2. इसकी ज्यादा देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए इसको लगाने से बिजली सस्ती पड़ती है! ‌। ‌‌
  • 3. ट्रांसफार्मर को बहुत अधिक वोल्टेज पर बनाने के लिए इंसुलेशन करना आसान होता है! ।
  • 4. इसकी लाइफ अधिक होती है!
  • 5 किसी भी जगह इसको लगा सकते है! इसके उपयोग के कारण ट्रांसमिशन और डिसटीब्यूशन सस्ती पड़ती है तथा एलुमिनियम या कॉपर की बचत हो जाती है

कोर की बनावट के अनुसार ट्रांसफार्मर के प्रकार

  1. कोर टाइप ट्रांसफॉर्मर।
  2. शैल टाइप ट्रांसफॉर्मर।
  3. बैरी टाइप ट्रांसफॉर्मर
  • कोर टाइप ट्रांसफॉर्मर = इसमें एल प्रकार की कोर उपयोग की जाती है जिसमें कोर आयताकार आकार मे आ जाती है यह कोर सिलिकॉन स्टील धातु की बनाई जाती है इसकी चार लिंब होती है तथा प्रत्येक लिंब का क्षेत्रफल एक दूसरे के बराबर होता है प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग किन्हीं दो विपरीत लिंब के ऊपर की जाती है चुंबकीय रेखाओ के लिए एक ही रास्ता होता है इस प्रकार का ट्रांसफार्मर कम पावर के लिए बनाया जाता है
  • इस प्रकार के ट्रांसफार्मर की सरचना मे दो UL व L आक्रति की स्ताम्पिंग्स का प्रयोग किया जाता है
  • वाइंडिंग कोर की दोनों भुजाओं पर स्थपित होती है
  • इस ट्रांसफार्मर मे चुम्बकीय परीपथ का एक ही मार्ग होता है
  • इस ट्रांसफार्मर द्वारा निम्न वोल्टेज आउटपुट पर प्राप्त होती है
  • कोर पर दो भुजा होती है
  • इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में हानिया अधिक होती है
  • कोर की दोनों भुजाओ का क्षेत्रफल समान होता है
  • ये ट्रांसफार्मर कम क्षमता के होते है
  • इस ट्रांसफार्मर मे लीकेज फ्लक्स अधित होता है
  • इनकी देखभाल एव मरमत करना सरल होती है

  • शैल टाइप ट्रांसफॉर्मर = यह ट्रांसफार्मर भी पतली पतली पत्तियों के मिलने से बनता है इसकी तीन लिंब होती है तथा बीच वाली लिंब का एरिया बाहरी लिंब से दुगना होता है प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग बीच वाली लिंब क्यों पर क्रमवार वाइंड की जाती है इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में ई और आई आकार की पत्तियां प्रयोग में लाई जाती है तथा चुंबकीय रेखाओ के लिए 2 मार्ग होते हैं इस प्रकार का ट्रांसफार्मर कम वोल्टेज वे अधिक पावर के लिए बनाया जाता है।
  • इस ट्रांसफार्मर में EI, Mव TU आक्रति की कोर स्टैम्पिंग का प्रयोग किया जाता है
  • कोर की मध्य भुजा पर वाइंडिंग स्थापित होती है
  • इस ट्रांसफार्मरमें चुम्कीय परिपथ के दो मार्ग होते है
  • इस ट्रांसफार्मर द्वारा उच्च वोल्टेज आउटपुट पर प्राप्त होती है
  • कोर पर तीन भुजा होती है
  • इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में हानिया कम होती है
  • कोर की दोनों भुजाओ का क्षेत्रफल समान होता है
  • ये ट्रांसफार्मर अधिक क्षमता के होते है
  • इस ट्रांसफार्मर मे लीकेज फ्लक्स कम होता है
  • इनकी देखभाल एव मरमत करना कठिन होती है

बैरी टाइप ट्रांसफॉर्मर = इस ट्रांसफार्मर के वितरित कोर टाइप ट्रांसफार्मर भी कहते हैं | यह ट्रांसफार्मर छोटा होता है लेकिन दूसरे दोनों प्रकार के ट्रांसफार्मर के गुण इसमें पाए जाते हैं चुंबकीय कोर आयताकार होता है और क्वायलो के चारों ओर लपेटी जाती है तार को कम करने के लिए बाहर क्वायलो की अपेक्षा कोर के बीच वाली लिंब का क्रॉस सेक्शन कुछ कम बनाया जाता है तथा इसमें कई चुंबकीय रास्ते बन जाते हैं इसलिए इससे बेरी टाइप ट्रांसफॉर्मर कहते हैं इस प्रकार ट्रांसफार्मर कम प्रयोग में लाए जाते हैं |

[ यह भी पढ़िए ]

x

Leave a Comment

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!