सोल्डर क्या है | सोल्डर कितने प्रकार के होते है | Solder In Hindi

Solder – सोल्डरिंग की क्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कार्य सोल्डर का ही होता है | बिना सोल्डर के सोल्डरिंग नही की जा सकती | यदि आप भी जानना चाहते है की Solder किसे कहते है, Solder कितने प्रकार के होते है तो यह पोस्ट आपके लिए लिए काम की हो सकती है |

solder in hindi
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सोल्डर क्या है | Solder in Hindi

सोल्डर एक प्रकार की मिश्र धातु होती है जिसका उपयोग हम किन्ही समान या अलग अलग धातुओं को आपस में चिपकाने के लिए करते है | सोल्डर टिन और लैड को अलग-अलग मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है, इसका गलनांक 205C और लैड का 327C होता है|

सोल्डर किसका मिश्रण है

सोल्डर दो धातुओं की मिश्र धातु है जोकि सामान्यतः लैड और टिन से तैयार होती है | यह कम तापमान पर पिघल जाती है| इसका प्रयोग स्टील, तांबा, पीतल,टिन, लैड इत्यादि से बनी हल्की वस्तुओं को जोड़ने के लिए किया जाता है |

सोल्डर धातु का गलनांक

सोल्डर का गलनांक 96 डिग्री सेंटीग्रेड से 255 डिग्री सेंटीग्रेड तक होता है इसका प्रयोग एक जैसी या अलग अलग धातुओं की पतली शीटों को जोड़ने के लिए किया जाता है |

विद्युतीय काम में केवल सॉफ्ट सोल्डर का ही प्रयोग किया जाता है जोकि लैड और टिन मिलाकर बनाया जाता है| जिससे इसका गलनांक 150 से 300 ‌‌ डिग्री सेंटीग्रेड होता है लेकिन इसमें बिस्मथ और एंटी मनी मिले होने से इसका गलनांक 96 डिग्री सेंटीग्रेडतक पहुंच जाता है | हार्ड सोल्डर कॉपर और जिंक को मिलाकर बनाया जाता है | इसमें कुछ मात्रा चांदी की भी मिलाई जाती है |जिससे इसका गलनांक 350 से 600 डिग्री सेंटीग्रेड तक होता है यह प्लंबर के काम में प्रयोग किया जाता है |

सोल्डर कितने प्रकार के होते है | Types Of Solder

सोल्डर कई प्रकार के होते हैं! सॉफ्ट सोल्डर, हार्ड सोल्डर, जर्मन सिल्वर सोल्डर, हार्ड जर्मन सिल्वर सोल्डर, सॉफ्ट जर्मन सिल्वर सोल्डर, आदि। लेकिन मुख्य रूप से सोल्डर दो प्रकार के होते हैं सॉफ्ट सोल्डर और हार्ड सोल्डर

सॉफ्ट सोल्डर = इसका उपयोग पतली शीटों को जोड़ने के लिए किया जाता है! इसके अलावा इसका उपयोग छोटे-छोटे तारों को जोड़ने के लिए भी किया जाता है! यह लैंड और टिन को मिलाकर तैयार किया जाता है! सॉफ्ट सोल्डर का प्रयोग करके धातु के दो या दो से अधिक भागों जोड़ने की क्रिया सॉफ्टसोल्डरिंग कहलाती है |

सॉफ्ट सोल्डरिंग करने की विधि निम्न प्रकार से है

( 1) सोल्डरिंग की जाने वाली सतह को सबसे पहले रासायनिक विधि द्वारा साफ किया जाता है |

(2) धातु और जॉब के अनुसार सोल्डरिंग आयरन व फ्लक्स का चुनाव किया जाता है |

( 3) जोड लगाने वाले स्थान पर पहले थोड़ा सा फ्लक्स लगाया जाता है |

( 4) गर्म सोल्डरिंग आयरन की बिट पर फ्लक्स लगाया जाता है ताकि ऑक्साइड परत दूर हो सके |

( 5) गर्म सोल्डरिंग आयरन की बिट पर सोल्डर लगाकर जॉब के जोड़ पर लगाया जाता है ताकि सोल्डर जोर के अंदर तक चला जाए |

( 6) सोल्डरिंग के पश्चात् जॉब को पानी से धो लेना चाहिए ताकि फ्लक्स धूल जाए स्वेटिंग यह एक प्रकार की सॉफ्ट सोल्डरिंग है |

इस क्रिया में जोड़े जाने वाले पार्ट कि सतह पर पहले टिनिंग करके इनकी सतह पर सोल्डर की कोटिंग कर दी जाती है | फिर दोनों भागों को मिलाकर क्लैंप कर दिया जाता है और जोड़ वाले स्थान पर फ्लक्स लगाकर गर्म किया जाता है ठंडा होने पर दोनों पार्ट एक साथ जुड़ जाते हैं |

हार्ड सोल्डर = यह तांबे तथा जिंक की मिश्र धातु होती है इसमें कभी-कभी चांदी भी मिलाई जाती है इस का गलनांक 350 डिग्री सेंटीग्रेड से 550 डिग्री सेंटीग्रेड तक होता है | यह सॉफ्ट सोल्डर की अपेक्षा कठोर होता है जब धातु के दो या दो से अधिक भागों को हार्ड सोल्डर (सिल्वर सोल्डर या स्पेल्टर) के प्रयोग द्वारा जोडा जाता है |

यह दो प्रकार की होती है

( 1) ब्रेजिंग = दो एक जैसी व भिन्न-भिन्न धातुओं पर कठोर जोड़ लगाने की विधि को ब्रेजिंग कहते हैं इसमें जोड़ने के लिए स्पेल्टर या सिल्वर सोल्डर प्रयोग में लाए जाते हैं

(2) सिल्वर सोल्डर का गलनांक स्पैल्टर के गलनांक से कम होता है इसका प्रयोग चांदी सोना जर्मन सिल्वर आदि धातुओं की चीजों में टांका लगाने के लिए करते हैं यह चार अनुपातों में बनाया जाता है

( 1) कॉपर = 33%+चांदी 67% चांदी की वस्तुओं में टांका लगाने के लिए प्रयोग करते हैं!

( 2) कॉपर = 20%+चांदी 70%+जिंक = 10% रजत आभूषणों में टांका लगाने के लिए प्रयोग करते हैं (3) कॉपर = 20%+चांदी = 10%+सोना = 70% सोने के आभूषण मे टांका लगाने के लिए प्रयोग करते हैं ( 4) कॉपर = 35%+जिंक = 55%+निकिल = 10% जर्मन सिल्वर में टांका लगाने के लिए प्रयोग करते हैं!

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सॉफ्ट सोल्डर =

  • 1) इसे कच्चा टांका कहते हैं!
  • 2) इसका जोड़ गरम होकर खुल जाता है
  • 3) यह टांका सीसे( लैड) एवं टीन को मिलाकर तैयार किया जाता है जो बहुत कम ताप पर पिघला कर लगाया जाता है
  • 4) यह काइया सोल्डरिंग आयरन द्वारा लगाया जाता है
  • 5) यह टाका हल्की वस्तु जैसे बिजली की तार आदि जोड़ने के काम आता है!
  • 6) इस टांके के लिए नौसादर को फ्लक्स के रूप प्रयोग करते हैं

धातु = 1. (तांबे के लिए 40%+टिन60%+अमोनिया क्लोराइड ) . 2.(पीतल के लिए 34%+66%+जिंक क्लोराइड) 3.(टिन शीट के लिए 37%+63%+ जिंक क्लोराइड) 4.(आयरन शीट के लिए 50%+50%+अमोनिया क्लोराइड) 6.(गेल्वेनाइज्ड जी . आई. सीट के लिए 42%+58%+हाइड्रोक्लोराइड 6.+( सोने के लिए 33%+67%+जिंक क्लोराइड) 7. चांदी के लिए 33%+67%+जिंक क्लोराइड) 8. जिंक के लिए 45%+55%+हाइड्रोक्लोरिक एसिड

हार्ड सोल्डर =

  • 1. यह पक्का जोड़ टांका होता हैं!
  • 2. यह तांबे और जिंक की मिश्र धातु होती है
  • 3. इससे जोड़ में सुहागे को फ्लक्स के रूप में काम में लेते हैं
  • 4. यह भट्टी मे गर्म करके या वेल्डिंग द्वारा लगाया जाता है
  • 5. यह भारी वस्तुओं को जोड़ने के काम में आता है बिजली की तार आदि जोड़ने के काम आता है!

धातु = 1. (तांबे के लिए 40%+टिन60%+अमोनिया क्लोराइड ).

2.(पीतल के लिए 34%+66%+जिंक क्लोराइड)

3.(टिन शीट के लिए 37%+63%+ जिंक क्लोराइड)

4.(आयरन शीट के लिए 50%+50%+अमोनिया क्लोराइड)

5.(गेल्वेनाइज्ड जी . आई. सीट के लिए 42%+58%+हाइड्रोक्लोराइड

6. +( सोने के लिए 33%+67%+जिंक क्लोराइड)

7. चांदी के लिए 33%+67%+जिंक क्लोराइड)

8. जिंक के लिए 45%+55%+हाइड्रोक्लोरिक एसिड

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